प्रशुल्‍क आयोग

वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय

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प्रशुल्‍क आयोग एक रूपरेखा

 

 वर्तमान प्रशुल्‍क आयोग 02 सितम्‍बर, 1997 में स्‍थापित किया गया था । इसके अधिदेश देश के विस्‍तृत आर्थिक हितों को मद्देनज़र रखते हुए उचित प्रशुल्‍क स्‍तरों की सिफ़ारिश करने के लिए एक स्‍वतन्‍त्र विशेषज्ञ समिति के रूप में कार्य करना है । 

 

       आयोग के विचारार्थ विषयों [1] में सितम्‍बर, 1998 में संशोधन किया गया ताकि इसमें, प्रशुल्‍कों के निर्धारण तथा वस्‍तुओं और सेवाओं के लिए प्रशुल्‍क से संबंधित विषयों, देश के प्रशुल्‍क युक्तिकरण के लिए एक समग्र ढांचा विकसित करना और व्‍यापारी सहभागियों से प्राप्‍त मार्केट पहुंच प्रस्‍तावों से संबंधित मामलों पर सिफ़ारिश करना, शामिल किया जा सके । आयोग इन क्षेत्रों में तभी देखता है जब सरकारी विभागों तथा एजेंसियों से यह आयोग को भेजे जाते हैं । इससे यह भी उम्‍मीद की जाती है कि उत्‍पादन लागत और औद्योगिक प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता पर प्रभाव विश्‍लेषण और तकनीकी अध्‍ययन करे । यह अनुरोध किया जाता है कि प्रशुल्‍कों तथा संबंधित मामलों पर आंकड़े की निगरानी करे और रख-रखाव करे ।

 

       आयोग इसको केन्‍द्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों द्वारा भेजे गए लागत निर्धारण और मूल्‍य निर्धारण मामलों पर अध्‍ययन करता है । इनमें निर्माण करने वाली सेवा और कृषि क्षेत्र शामिल हैं । राज्‍य सरकारों और उनकी एजेंसियों से संबंधित मामलों पर भी आयोग द्वारा अध्‍ययन किया जाता है । उद्योग संघों द्वारा उठाए गए विषयों के उत्‍तर में प्राय: अध्‍ययन किये जाते हैं । इसलिये आंकड़ा आधार और व्‍यापार तथा व्‍यापार संबंधित निकायों, एजेंसियों और सरकारी विभागों द्वारा बनाए गए सूचना के मध्‍य घनिष्‍ट संबंध है । 

 

       आयोग की अध्‍यक्षता भारत सरकार के सचिव पद के एक पूर्णकालिक अध्‍यक्ष द्वारा की जाती है, जिसकी सहायता अतिरिक्‍त सचिव के पद के सदस्‍य-सचिव द्वारा की जाती है ।

 

       औद्योगिक लागत तथा मूल्‍य ब्‍यूरो (औ0ला0मू0ब्‍यू0) का 01 अप्रैल, 1999 में आंतरिक सहायता प्रदान करने के लिये प्रशुल्‍क आयोग में विलय कर दिया गया था । इसके आंकड़ा आधार अर्थशास्‍त्रियों, वैज्ञानिकों, लागत तथा चार्टर्ड लेखाकारों, सांख्यिकियों तथा प्रशासकों की एकत्र की गई बहु-आयामी सुविज्ञता अब प्रशुल्‍क आयोग का भाग है ।

 

       सिफ़ारिशों संबंधित आर्थिक परिमापों के विश्‍लेषण पर आधारित होती हैं जैसे अन्‍तर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार में प्रवृत्ति, मांग तथा आपूर्ति, भावी उन्‍नति, प्रौद्योगिकी, प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता, कर और प्रशुल्‍क नीति । एक उत्‍पाद अथवा सेवा के लिए अनुमानित उचित कीमत, वास्‍तविक संचलन तथा वित्‍तीय परिणामों और दक्षता मानकों का विचार कर, निकाली जाती है । 

 

       आयोग ने उस समय के औ0ला0 तथा मू0ब्‍यू0 द्वारा लिया गया कार्य किया है और इसकी अपनी लागत निर्धारण और निर्माण करने के विस्‍तृत क्षेत्र पर अन्‍य रिपोर्टें [2] जैसे खनन और संसाधन क्षेत्र जैसे उर्वरक, धातुएं, पेट्रो-रसायन, इंजीनियरी उद्योग, कोयला, चीनी इत्‍यादि, पेश की हैं । विशिष्‍ट उद्योगों जैसे अख़बार, सेलूलर टेलीफोन, मिनी सिमेंट संयत्र, जहाज़रानी इत्‍यादि पर अध्‍ययन किया है ।

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[1]    को जोड़ा जायेगा (विचारार्थ विषय के रूप में)

[2]    को जोड़ा जायेगा (प्रमुख अध्‍ययनों के रूप में) 

 

 

2364;ा जायेगा (प्रमुख अध्‍ययनों के रूप में)