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सूचना
अधिनियम 2005 का अधिकार For
English Version Click Here [धारा (1) (ख)
के अधीन अंतर्विष्ट
है] 1. संगठन का
विवरण कार्य और
कर्त्तव्य
:- (क) पृष्ठभूमि
:- स्वतंत्रता
से पूर्व के समय
में, ‘’घरेलू
उद्योग को संरक्षण
देने के लिए सरकार
को आवश्यक उपाय
सुझाने हेतु वाणिज्य
मंत्रालय में
एक प्रशुल्क
बोर्ड अस्तित्व
में था । इसे प्रशुल्क
आयोग अधिनियम
1951 द्वारा आयोग में
परिवर्तित कर
दिया गया । आयोग
के मुख्य कार्य
थे – विभिन्न
अध्ययन करना
और सरकार को भारतीय
उद्योगों के उचित
संरक्षण के लिए
ज़रूरी उपायों
की सिफ़ारिश करना,
विशिष्ट उद्योगों
के संबंध में सीमा
और उत्पाद शुल्कों
में आवश्यक कमी
लाना तथा वस्तुओं
के पाटन (डंपिंग)
के प्रति उपचारी
उपायों की सिफ़ारिश
करना । आयोग ने
स्व प्रेरित
अध्ययन भी किए
1951 में वित्त
मंत्रालय के अधीन
स्थापित प्रशुल्क
आयोग 1976 में, दूसरे
वित्त आयोग की
इस टिप्पणी के
आधार पर कि आयोग
के अधिकांश कार्य
औद्योगिक लागत
तथा मूल्य ब्यूरो
के समान है जो प्रशासनिक
सुधार आयोग की
सिफ़ारिश पर 1970 में
गठित किया गया
था, 1976 के प्रशुल्क
आयोग (निरसन) अधिनियम
द्वारा समाप्त
कर दिया गया । औद्योगिक
लागत तथा मूल्य
ब्यूरो का अगस्त,
1997 में विभाजन किया
गया और राष्ट्रीय
भैषजीय मूल्य
निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) बनाया
गया और इसे रसायन
एवं उर्वरक मंत्रालय
के अधीन रखा गया
। वर्ष 1991-92
में तत्कालीन
वित्त मंत्री
ने अपने बजट भाषण
में कहा था – ‘‘.......... मैं समझता
हूं कि अब समय आ
गया है कि एक ज़्यादा
पारदर्शी संस्थानिक
तंत्र विकसित
किया जाए जो उन
क्षेत्रों में
प्रशुल्कों
और घरेलू क़ीमतों
का निर्धारण करे
जहां विदेशी प्रतिस्पर्धा
के प्रति भारतीय
उद्योग के संरक्षण
की आवश्यकता
हो और विशेषकर
लोक उपयोगिता
के क्षेत्र में
प्रशासनिक क़ीमतों
के निर्धारण की
ज़रूरत
हो । इस उद्देश्य
के लिए, हम औद्योगिक
लागत तथा मूल्य
ब्यूरो का पुनर्गठन
करने और इसे प्रशुल्क
आयोग में बदलने
का प्रस्ताव
करते हैं ।’’ इसके अतिरिक्त
1996-97 में तत्कालीन
वित्त मंत्री
ने अपने 1996-97 बजट भाषण
में कहा था :- ‘‘.......... सामान्य
न्यूनतम कार्यक्रम
(सा.न्यून.कार्य.)
में किए गए वायदों
को ध्यान में
रखते हुए सरकार
ने एक स्वतंत्र
प्रशुल्क आयोग
स्थापित करने
के लिए कार्रवाई
शुरू कर दी है ।’’ 02 सितम्बर,
1997 में वर्तमान आयोग
स्थापित किया
गया । 1999 में, औ.ला.मू.ब्यूरो
का इसके मर्म कार्यों
के साथ प्रशुल्क
आयोग में विलयन
किया गया । (ख) संगठन :- आयोग
के प्रमुख भारत
सरकार के सचिव
स्तर के पूर्ण-कालिक
सदस्य हैं और
उनकी सहायता के
लिए भारत सरकार
के अपर सचिव स्तर
के पूर्ण-कालिक
सदस्य-सचिव हैं
। दो अंश-कालिक
सदस्यों को भी
रखने का प्रावधान
है जो वित्त, अर्थशास्त्र,
उद्योग, वाणिज्य
और विज्ञान तथा
प्रौद्योगिकी
सहित संबंधित
क्षेत्रों से
ख्याति प्राप्त
व्यक्ति हों
। आयोग में,
विशिष्टता प्राप्त
तीन कार्यकारी
प्रभाग हैं अर्थात्
आर्थिक, विज्ञान
एवं प्रौद्योगिकी और लागत
एवं वित्त । इसके
अतिरिक्त, इसके
प्रशासनिक सचिवालय
तथा इलेक्ट्रॉनिक
डाटा प्रोसेसिंग
शाखाएं क्रमश:
प्रशासनिक सचिवालयी
और ईडीपी सहायता
उपलब्ध कराता
है । प्रशासनिक
शाखा में वे अनुभाग
शामिल है जो स्थापना,
सामान्य प्रशासन,
रोकड़, हिंदी सतर्कता,
कोर्ट मामले, प्रशिक्षण,
पुस्तकालय और
अन्य विविध प्रशासनिक
मामालों से संबंधित
कार्य करते हैं
। सचिवालय शाखा
विभिन्न मामलों,
जिसमें पूर्ण
किए गए अथवा चल
रहे अध्ययनों
से संबंधित मामले
शामिल हैं, पर आंतरिक
आवश्यक सचिवालयी
सहायता उपलब्ध
कराती है । इलेक्ट्रॉनिक
डाटा प्रोसेसिंग
यूनिट उन सब मामलों
का कार्य करती
हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी
से संबंधित होने
के साथ-साथ वेबसाइट
पर सूचना डालने
और अद्यतन का कार्य
करती हैं जो आयोग
के अधिकारियों
को कम्प्यूटर
खरीदने सहित कम्प्यूटर
से संबंधित मामलों
पर सहायता उपलब्ध
कराता है । तीन विशिष्टता
प्राप्त कार्यकारी
प्रभागों के अध्यक्ष
उनके संबंधित
क्षेत्रों में
भारत सरकार के
संयुक्त सचिव
स्तर के मुख्य
सलाहकार होते
हैं । उनकी सहायता
करने के लिए सलाहकार,
निदेशक, उप/सहायक
निदेशक इत्यादि
उनके प्रभागों
में कार्य करते
हैं । आयोग में
अधिकारी/स्टाफ़
विभिन्न केन्द्रीय
सेवाओं के हैं
– जैसे
आईएएस, आईसीएएस,
आईईएस, आईएसएस,
सीएसएस, सीएसएसएस
इत्यादि । आयोग
के तकनीकी प्रभाग
में कार्य करने
के लिए आयोग के
वैज्ञानिक तथा
इंजीनियरी व्यक्तियों
का इसका अपना संवर्ग
है । आयोग की संगठनात्मक
संरचना
निम्नलिखित
है :- संगठनात्मक
चार्ट
|
आयोग की
वर्तमान स्टाफ़
संख्या निम्नलिखित
है :-
|
क्रम संख्या |
समूह पद
|
मंजूर
किए गए पदों की
संख्या |
खाली पड़े
पदों की संख्या
|
|
|
|
|
मंजूर
किए गए |
भरे
हुए |
|
|
1.
|
समूह ‘क’ |
78 |
33 |
45 |
|
2.
|
समूह
‘ख’ राजपत्रित समूह
‘ख’ अराजपत्रित |
16 28 |
10 21 |
6 7 |
|
3.
|
समूह
‘ग’ अराजपत्रित |
39 |
24 |
15 |
|
4.
|
समूह
‘घ’ |
23 |
23 |
- |
|
|
कुल |
184 |
112 |
72 |
आयोग का
कार्यालय निम्नलिखित
पते पर स्थित है
:-
प्रशुल्क
आयोग
सातवां
तल, (ए विंग),
लोक नायक
भवन,
खान मार्केट,
नई दिल्ली
– 110003
(ग) कार्य :-
आयोग
को निम्नलिखित
कार्य सौंपे गए
हैं :-
(क)
वस्तु
तथा सेवा में व्यापार
से संबंधित प्रशुल्क
निर्धारण तथा प्रशुल्क
संबंधी सभी मामलों
पर, सरकार द्वारा
भेजे गए और उपभोक्ताओं/मामलों
पर उत्पादन, व्यापार
सहित विभिन्न
क्षेत्रों के हितों
तथा अन्तर्राष्ट्रीय
वचनबद्धता को ध्यान
में रखते हुए एक
विशेषज्ञ निकाय
के रूप में सिफ़ारिशें
देना ।
(ख)
(सरकार द्वारा
दिए गए विषयों
के अनुसार) विश्व
व्यापार संगठन
ढांचा के एक भाग
के रूप में व्यापारिक
भागीदारों से प्राप्त
पेशकशों का बाज़ार
तक पहुंचाने का
विवेचनात्मक
अध्ययन करना तथा
इन पेशकशों से
उत्पन्न अवसरों
तथा चुनौतियों
पर सरकार को सलाह
देना ।
(ग)
(घ)
एक बहु-आयामी
दल के माध्यम
से वस्त्र, कृषि,
ऑटोमोबाइल, सूचना
प्रौद्योगिकी,
रसायन, इस्पात
तथा इंजीनियरी
वस्तुओं जैसे
चुनिंदा क्षेत्रों
पर विस्तृत विश्लेषण
करना ।
(ङ)
चुनिंदा
उद्योगों के लिए
आवश्यक संक्रांति
काल की जांच करना
और सुधारात्मक
प्रक्रिया की सुविधा
करने के लिए प्रशुल्कों
से इनका चरणबद्ध
तरीके से बाहर
निकालना जैसा कि
इसे सरकार द्वारा
समय-समय पर भेजा
जाता है ।
(च)
सरकार द्वारा
समय-समय पर चुनिंदा
आर्थिक क्रियाकलापों
के लिए प्रशुल्क
निर्धारण करने
की प्रक्रिया का
अभिनिर्धारण आयोग
को सौंपा जाता
है ।
(छ)
व्यापारिक
साझा देशों तथा
प्रतियोगी देशों
में प्रशुल्क
परिवर्तनों की
निगरानी करना तथा
पर्याप्त रूप
से ब्योरे स्तर
पर प्रशुल्क दरों
की सूची का अनुरक्षण
करता है ।
(ज)
विभिन्न
वस्तुओं तथा सेवाओं
की उत्पादन लागत
तथा अन्य देशों
की तुलना में उनकी
प्रतिस्पर्धात्मकता
का तकनीकी अध्ययन
करना ।
(झ)
वस्तुओं
के वर्गीकरण तथा
उत्पादों से संबंधित
सरकार द्वारा सौंपे
गए पर और साथ ही
ऐसे वस्तुओं एवं
उत्पादों पर लागू
किए जाने योग्य
प्रशुल्क संबंधी
मामलों पर सलाह
देना ।
(ञ)
सरकार द्वारा
समय-समय पर सौंपे
गए ऐसे अन्य कार्य
करना ।
(ट)
अपने कार्यकलापों
के संबंध में सरकार
को वार्षिक रिपोर्ट
प्रस्तुत करना
।
2. इसके अधिकारियों
तथा कर्मचारियों
की शक्तियां तथा
कर्त्तव्य
:-
इस आयोग
के द्वारा किए
जाने वाले संबंधित
कार्य, इस आयोग
के पास क़ानूनी
शक्ति नहीं है
क्योंकि यह एक
सलाहकार निकाय
है । प्रशासनिक
और वित्तीय शक्तियां
तथा विभिन्न पदाधिकारियों
के कर्त्तव्य
निम्नलिखित हैं
:-
अध्यक्ष
भारत
सरकार के सचिव
स्तर के आयोग
के अध्यक्ष संगठन
के प्रमुख हैं
और सरकारी कार्य
के संचालन के लिए
अधिकृत हैं । तदनुसार
वे आयोग के कार्य
को पर्यवेक्षण,
समन्वय, नियंत्रण
तथा निरीक्षण करने
के लिए अपनी शक्तियों
का प्रयोग करते
हैं ।
सदस्य-सचिव
अध्यक्ष
से दूसरे सदस्य-सचिव,
भारत सरकार के
अतिरिक्त सचिव
स्तर के आयोग
के एक सदस्य हैं
। उन्हें अध्यक्ष
की सभी शक्तियों
से पुन: प्रत्यारोपित
किया गया है । वे
अध्यक्ष को उसके
कार्य करने के
लिए और कर्त्तव्य
निभाने के लिए
सहायता करते हैं
और आवश्यक सहायता
देते हैं ।
सचिव
प्रशासनिक
और सचिवालय शाखाएं
सभी प्रशासनिक
कार्य जैसे स्थापना,
सामान्य प्रशासन,
रोकड़, हिंदी इत्यादि
मामले और आंतरिक
सचिवालयी सहायता
जो आयोग के अधिकारियों
को दी जाती है, के
प्रमुख आयोग के
सचिव होते हैं
। इन शाखाओं में
अनुभागों से आने
वाले कार्य का
संचालन निदेशक,
अवर सचिव, उपनिदेशक,
सहायक निदेशक/अनुभाग
अधिकारी और सहायक
स्टाफ़ की सहायता
से करता है । अपेक्षित
कार्य करने के
लिए विभागाध्यक्ष
द्वारा उन्हें
संबंधित डीएफ़पीआर,क/जीएफ़आर,स
के अधीन निश्चित
वित्तीय पैरामीटर
के साथ शक्तियां
पुन: प्रत्यारोपित
की जाती है । इसके
अतिरिक्त वह आयोग
द्वारा हाथ में
लिए गए अध्ययनों
का समन्वयीकरण
करता है ।
निदेशक
(प्रशासन)
निदेशक
(प्रशासन) जो डीएफ़पीआर,स
के अधीन कार्यालय
का अध्यक्ष होता
है, अवर सचिव की
मदद से सभी प्रशासनिक
कार्यों के संचालन
में सचिव की मदद
करता है । इसके
अतिरिक्त वह आयोग
द्वारा हाथ में
लिए गए अध्ययनों
में सहयोगी होता
है ।
मुख्य
सलाहकार (प्रभागाध्यक्ष)
तीन
विशिष्ट कार्यात्मक
प्रभागों जैसे
तकनीकी, आर्थिक
और लागत प्रभाग
जो आयोग के एस एण्ड
टी संवर्ग से संबंधित
हैं, भारतीय आर्थिक
सेवा और भारतीय
लागत लेखा सेवा
में क्रमश: तीन
मुख्य सलाहकार
हैं । वे सभी भारत
सरकार के संयुक्त
सचिव स्तर के
हैं । विशेषज्ञ
तथा संबंधित प्रभाग
के प्रमुख होने
के नाते, वे उनके
प्रभागों से संबंधित
विषयों के गहन
विश्लेषण के लिए
उत्तरदायी होते
हैं तथा आयोग द्वारा
हाथ में लिए गए
अध्ययनों तथा
रिपोर्ट तैयार
करने में शामिल
होते हैं । वे योजना
बनाने, दिशा-निर्देश
देने, अध्ययन
टीमों का पर्यवेक्षण
करने और उनके संबंधित
प्रभागों के अध्ययनों
का समय पर समापन
करने के
साथ-साथ आयोग
को अनुमोदन के
लिए प्रस्तुत
की जाने वाली रिपोर्टों
को अंतिम रूप देने
के लिए पूर्ण रूप
से उत्तरदायी
हैं । इस कार्य
में उन्हें सलाहकार/निदेशक/उपनिदेशक/सहायक
निदेशक द्वारा
सहायता दी जाती
है । वे समय-समय
पर सरकार द्वारा
इन्हें भेजे गए
विभिन्न मामलों
पर आयोग को सलाह
देते हैं ।
3. पर्यवेक्षण
तथा लेखा-जोखा
के माध्यमों सहित,
निर्णय करने की
प्रक्रिया में
अपनाया गया तरीका
:-
औद्योगिक
नीति और संवर्धन
विभाग (डीआईपीपी)
का एक संबंधित
कार्यालय होते
हुए, प्रशुल्क
आयोग समय-समय पर
सरकार द्वारा जारी
किए गए सभी नियमों,
विनियमों तथा अनुदेशों
का अनुसरण सभी
प्रशासनिक कार्य
करने में करता
है ।
आयोग
द्वारा हाथ में
लिए गए अध्ययनों
के तकनीकी कार्य
से संबंधित कार्य,
इस उद्देश्य के
गठित तीन विशिष्ट
प्रभागों से आए
हुए प्रतिनिधियों
की अध्ययन टीम
द्वारा किया जाता
है । ये अध्ययन
टीमें प्रभाग प्रमुखों
तथा सदस्य-सचिव
के निर्देश से
विचारार्थ विषयों
को अंतिम रूप देना,
गतिविधिवार समय
सूची तैयार करना,
प्रणाली विज्ञान
इत्यादि और दिए
गए समय के अन्दर
कार्य पूरा करना
जिसमें रिपोर्ट
प्रस्तुत करना
शामिल है जैसे
आयोग को सिफ़ारिशें
करना जो भारत सरकार
के संबंधित अनुरोधकर्ता
विभाग/मंत्रालय
को भेजा जा सके
। एक सलाहकार निकाय
होने के नाते, सिफ़ारिशों
का कार्यान्वयन
अनुरोधकर्ता प्रशासनिक
मंत्रालय पर निर्भर
करता है । संगठनात्मक
चार्ट में पर्यवेक्षण
के विभिन्न स्तर
पहले ही दिए जा
चुके हैं ।
4. इसके द्वारा
इसके कार्यों के
संचालन के लिए
बनाए गए प्रतिमानक
:-
आंतरिक
प्रशासनिक कार्यों
के संबंध में, आयोग
विभिन्न नियम
पुस्तकों, जिनमें
भारत सरकार का
कार्यालय पद्धति
का मैनुअल भी शामिल
है, में दिए गए प्रतिमानकों
का पालन करता है
। अध्ययनों के
संबंध में मर्म
कार्य के लिए, आंकड़ा
का विश्लेषण और
भारत सरकार को
सिफ़ारिश करना,
आयोग के कोई पूर्वनिर्धारित
प्रतिमानक नहीं
होते । प्रत्येक
अध्ययन अपूर्व
है और इसका विश्लेषण,
अध्ययन की प्रकृति
और प्रकार, टाइमफ्रेम,
डाटा की उपलब्धता
और अनुरोधकर्ता
मंत्रालय द्वारा
सौंपे गए विचारार्थ
विषय पर निर्भर
करता है । अध्ययन
को विचारार्थ विषय
के अनुसार समय
पर समापन करने
को सुनिश्चित करने
के लिए आयोग एक
गतिविधिवार समय
सूची अनुसरण करने
के लिए तैयार करता
है ।
5. नियम, विनियम,
अनुदेश, नियमावली
और रिकार्ड जो
इसके पास या इसके
नियंत्रण में है
अथवा इसे कर्मचारियों
द्वारा इसके कार्यों
के संचालन में
प्रयोग किए जाते
हैं :-
आयोग
के प्रशासनिक कार्य
करने के संबंध
में, समय-समय पर
भारत सरकार द्वारा
जारी नियम पुस्तकें/दिशा-निर्देश/अनुदेश,
संदर्भ के लिए
संबंधित अनुभागों
में रखे जाते हैं
और संबंधित मामलों
के आवेदन भी रखे
जाते हैं । इंटरनेट
पर उपलब्ध सूचना
और प्राथमिक/माध्यमिक
संसाधनों से एकत्रित
सूचना भी कर्मचारियों
द्वारा इसके कार्यों
के संचालन के लिए
उपयोग की जाती
है ।
तकनीकी
मामलों पर, आयोग/औद्योगिक
नीति और संवर्धन
विभाग द्वारा पूर्ण
किए गए अध्ययनों
की सभी संबंधित
फ़ाइलों तथा कापियों
को रखा जाता है
। महत्वपूर्ण
नियम पुस्तकों/जरनलों,
विभिन्न विषयों
पर रिपोर्ट पुस्तिकाएं
भी संदर्भ के लिए
पुस्तकालय में
रखी जाती हैं ।
6. दस्तावेजों
की श्रेणियों की
एक विवरणी जो इसके
द्वारा रखी जाती
हैं अथवा
इसके नियंत्रण
के अधीन रहती हैं
:-
आयोग
द्वारा रख-रखाव
किए गए दस्तावेजों
के साथ-साथ सभी
संबंधित फ़ाइलों/दस्तावेजों
जैसे i)
अधिकारियों
और कर्मचारियों
की वैयक्तिक फ़ाइलों
ii) पंचवर्षीय/वार्षिक
योजनाओं, बजट मामलों
इत्यादि से संबंधित
वित्तीय मामले
iii) संसदीय
मामले
iv) हाउसकीपिंग
मामले v) वेतन
बिल रजिस्टर vi) आयोग के
नियंत्रण में पदों
पर कार्यरत अधिकारियों
की वार्षिक गोपनीय
रिपोर्ट और प्रोपर्टी
रिटर्न शामिल है
। इसके अतिरिक्त
औद्योगिक लागत
तथा मूल्य ब्यूरो/प्रशुल्क
आयोग द्वारा पूर्ण
किए गए सभी अध्ययनों
की प्रतियां भी
आयोग में रिकार्ड
और सन्दर्भ के
उद्देश्य के लिए
रखी जाती है । आयोग
के पुस्तकालय
में सभी महत्वपूर्ण
नियम पुस्तकें/जरनल
और संबंधित विषयों
पर पुस्तकों के
अतिरिक्त कर्मचारियों
की रुचि की अन्य
पुस्तकें भी रखी
जाती हैं ।
7. अन्य व्यवस्थाओं
का ब्योरा जो
जनता के सदस्यों
के द्वारा परामर्श
अथवा प्रतिनिधित्व
के साथ इसकी नीति
के बनाने अथवा
कार्यान्वयन
करने के लिए अस्तित्व
में आता है :-
आयोग
में किए गए कार्य
की प्रकृति और
प्रकार को मद्देनज़र
रखते हुए जनता
के किसी भी व्यक्ति
की परामर्श के
उद्देश्य के लिए
कोई प्रत्यक्ष
पहुंच नहीं है
। इसीलिए परामर्श
इत्यादि के लिए
कोई व्यवस्था
नहीं बनाई गई है
। फिर भी, यदि अनुरोधकर्ता
मंत्रालय के माध्यम
से कोई अभ्यावेदन
प्राप्त होता
है, तो उस पर कार्रवाई
की जाती है जिसके
लिए इसकी प्रकृति,
विषय सूची और सरकारी
विभाग/संस्थान
के साथ संबंध, इसके
उद्देश्य और आयोग
के द्वारा निर्धारित
प्रक्रिया के अनुसार
विस्तृत प्राकृतिक
हितों को ध्यान
में रखा जाता है
। जनता आयोग से
संबंधित अपेक्षित
सूचना और संबंधित
विवरण, जिसमें
औद्योगिक लागत
तथा मूल्य ब्यूरो/आयोग
द्वारा पूर्ण किए
गए अध्ययनों की
सूची शामिल है,
आयोग के वेबसाइट
के पते पर इसकी
वेबसाइट से प्राप्त
कर सकते हैं ।
8. बोर्डों,
परिषदों, समितियों
और इसकी सलाह के
लिए अथवा इसके
भाग के रूप में
गठित दो या दो से
ज़्यादा व्यक्ति
जिसमें शामिल हो,
वे अन्य निकायों
का विवरण और इन
बोर्डों, परिषदों,
समितियों और अन्य
निकायों की बैठकें
जनता के लिए खुली
हैं अथवा इन बैठकों
का कार्यवृत जनता
के लिए प्रवेश्य
नहीं है :-
लागू
नहीं ।
9. इसके अधिकारियों
और कर्मचारियों
की एक निदेशिका
:-
टेलीफोन
निदेशिका जिसमें
सरकारी और आवासीय
टेलीफोन संख्या
शामिल है और अनुभाग
अधिकारी तथा उसके
ऊपर के अधिकारियों
के पते वेबसाइट
पर दर्शाए गए हैं
और संलग्नक ‘क’ पर संलग्न
है ।
10. इसके प्रत्येक
अधिकारी तथा कर्मचारी
द्वारा प्राप्त
किया जाने वाला
मासिक पारिश्रमिक,
इसके विनियमों
में उपलब्ध कराए
जाने वाले क्षतिपूर्ति
की पद्धति सहित
:-
मासिक
पारिश्रमिक जो
अधिकारियों तथा
कर्मचारियों को
दिया जाता है, पद
से पद अलग-अलग होता
है । उनको उनके
संबंधित वेतनमान
में उनके मूल वेतन
पर वार्षिक वृद्धि
भी मिलती है । मूल
वेतन के अतिरिक्त
सरकारी कर्मचारियों
को जैसा भी लागू
हो, अन्य भत्ते
दिए जाते हैं ।
इस आयोग में विभिन्न
पदों के लिए मूल
वेतनों का विवरण
संलग्नक ‘ख’ पर संलग्न
है ।
11. इसकी प्रत्येक
एजेन्सी को आवंटित
बजट, सभी योजनाओं
के विवरण का दर्शाना,
प्रस्तावित व्यय
और संवितरण पर
बनाई गई रिपोर्ट
:-
वित्तीय
वर्ष 2005-06 के लिए प्रशुल्क
आयोग के लिए योजना
और ग़ैर-योजना
बजट आवंटन संलग्नक
‘ग’ पर है । योजना
आवंटन गतिविधियों
जैसे विकासात्मक
अध्ययनों, कम्प्यूटरीकरण
तथा पुस्तकालय
एवं मूलभूत विकासों
पर बैठक व्यय
के लिए उपयोग किया
जाता है । ग़ैर-योजना
व्यय, वेतन, मज़दूरी,
टीए/डीए, कार्यालय
व्यय, प्रकाशन
इत्यादि जैसी
मदों पर ख़र्च
किया जाता है ।
12. छूट कार्यक्रमों
का आवंटित राशि
सहित कार्यान्वयन
का तरीक़ा तथा
ऐसे कार्यक्रमों
के लाभार्थियों
की विवरणी :-
लागू
नहीं ।
13. इसके द्वारा
प्रदान किए गए
रियायत, परमिट
अर्थात प्राधिका़र
का विवरण :-
लागू
नहीं ।
14. सूचना के
संबंध में विवरणी
इसके पास उपलब्ध
होना अथवा इसके
द्वारा रखी जाना,
एक इलेक्ट्रॉनिक
फार्म में रह जाना
:-
वार्षिक
रिपोर्ट और औद्योगिक
लागत तथा मूल्य
ब्यूरो/प्रशुल्क
आयोग द्वारा पूर्ण
किए गए अध्ययनों
की सूची और चल रहे
अध्ययन एचटीटीपी://टीसी.एनआईसीइन
वेबसाइट पर उपलब्ध
है ।
15.
सूचना प्राप्त
करने के लिए नागरिकों
को उपलब्ध सुविधाओं
का विवरण जिसमें
यदि जनता के उपयोग
के लिए यदि रख-रखाव
किया गया है तो
पुस्तकालय अथवा
पठन कक्ष के कार्य
घंटे शामिल हों
:-
प्रशुल्क
आयोग के कार्य
की प्रकृति से
जनता के किसी सदस्य
को प्रत्यक्ष
अभिगमन नहीं है
। आयोग का पुस्तकालय
पूर्ण रूप से इसके
अधिकारियों/कर्मचारियों
द्वारा सन्दर्भ
के उद्देश्य से
है । जनता प्रशुल्क
आयोग की वेबसाइट
इसके पते जैसे
एचटीटीपी/टीसीएनआईसी
पर देख सकती है
अथवा ज़्यादा विवरण
के लिए अधिकारी
से सम्पर्क कर
सकती है ।
16. जन सूचना
अधिकारियों के
नाम, पदनाम तथा
अन्य विवरण
जन सूचना
अधिकारी और सहायक
जन सूचना अधिकारियों
के विवरण निम्नलिखित
है :-
नाम
- श्रीमती
मधुरिका राव
पदनाम - वरिष्ठ
प्रणाली विश्लेषक
प्रशुल्क
आयोग, फोन – 2426 1514
पता
: सातवाँ तल, लोक
नायक भवन, ख़ान
मार्केट,
नई दिल्ली
– 110003
नाम
- श्री
आर.के. पुरी
पदनाम - आर्थिक
अधिकारी
पता
: प्रशुल्क आयोग,
नवाँ तल, लोक नायक
भवन, ख़ान मार्केट,
नई दिल्ली
– 110003
इस आयोग
में श्री ए.के. मक्कड़,
निदेशक (विज्ञान
और प्रौद्योगिकी)
और श्री महेन्द्र
कुमार (औद्योगिक
सलाहकार), जन सूचना
अधिकारी, उपनिदेशक
(सचिवालय) को दिशा-निर्देश
तथा सहायता उपलब्ध
कराएंगे जो केन्द्रक
अधिकारी होने के
कारण अपेक्षित
सूचना जनता में विकीर्णन
के लिए प्राप्त
करेंगे ।
17. ऐसी अन्य
सूचना जो निर्धारित
की जा सकती है :-
प्रशुल्क
आयोग एक पूर्णतया
सलाहकार निकाय
है । यह विस्तृत
रूप से जनता के
संबंध में कोई
नीति नहीं बनाता
अथवा वैधानिक अथवा
प्रशासनिक कोई
शक्ति का प्रयोग
नहीं करता । फिर
भी यह कार्यालय
के आंतरिक प्रशासन
तथा इसके कर्मचारियों
के संबंध में निर्णय
लेता है और इसके
कार्यों का संचालन
करता है जैसे इसको
भेजे गए विशिष्ट
विषयों पर अध्ययन
करना अथवा स्वप्रेरित
आधार पर अध्ययन
करना ।
अध्ययन
करने के लिये अन्य
पार्टियों से प्राप्त
सूचना और अध्ययन
रिपोर्ट के विषयों
का बांटना, सूचना
अधिकार अधिनियम
से संबंधित प्रावधान
के अनुसार विस्तृत
राष्ट्रीय राष्ट्रीय
हित को ध्यान
में रखते हुए उनकी
संवेदनशीलता, सूचना/अध्ययन
की प्रकृति और
मामले से मामले
के आधार पर किया
जाएगा ।